Monday 08-Dec-2025

बिहार शिक्षक भर्ती में 84.4% सीटें बिहारियों के लिए आरक्षित: डोमिसाइल नीति पर लगी मुहर, नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

बिहार शिक्षक भर्ती में 84.4% सीटें बिहारियों के लिए आरक्षित: डोमिसाइल नीति पर लगी मुहर, नीतीश सरकार का बड़ा फैसला

इम्पैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार में शिक्षक भर्ती (शिक्षक बहाली) को लेकर नीतीश कुमार सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) में 84.4% सीटें बिहार के मूल निवासियों (डोमिसाइल) के लिए आरक्षित की गई हैं। मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस डोमिसाइल नीति को मंजूरी दी गई, जिसके तहत अब शिक्षक भर्ती में बिहार के स्थायी निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस फैसले को बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश सरकार का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है, क्योंकि यह लंबे समय से चली आ रही स्थानीय उम्मीदवारों की मांग को पूरा करता है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस नीति की घोषणा की। उन्होंने लिखा, नवंबर 2005 में सरकार बनने के बाद से ही हमलोग शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार काम कर रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण हेतु बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। शिक्षकों की बहाली में बिहार के निवासियों (डोमिसाइल) को प्राथमिकता देने हेतु शिक्षा विभाग को संबंधित नियम में आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दिया गया है। यह TRE-4 से ही लागू किया जाएगा।कैबिनेट की बैठक में स्वीकृत बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक नियुक्ति, स्थानांतरण, अनुशासनात्मक कार्रवाई एवं सेवा शर्त संशोधन नियमावली 2025 के तहत, कुल सीटों में से 84.4% बिहार के मूल निवासियों के लिए आरक्षित होंगी। इस आरक्षण का ब्रेकडाउन इस प्रकार है:

•  जातिगत आरक्षण: 50% (SC/ST/OBC) + 10% (EWS) = 60%

•  महिला आरक्षण: शेष 40% अनारक्षित सीटों में से 35% बिहार की मूल निवासी महिलाओं के लिए = 14%

•  डोमिसाइल आधारित आरक्षण: शेष 26% में से 40% (बिहार से मैट्रिक/इंटर पास उम्मीदवारों के लिए) = 10.4%

•  कुल आरक्षित सीटें: 60% + 14% + 10.4% = 84.4%

इसके परिणामस्वरूप, केवल 15.6% सीटें ऐसी रहेंगी, जिन पर बिहार और अन्य राज्यों के सामान्य वर्ग के उम्मीदवार (पुरुष और महिला) आवेदन कर सकेंगे।बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित TRE-4 परीक्षा 2025 में होगी, जिसमें 1.6 लाख से अधिक शिक्षक पदों पर भर्ती की जाएगी, जो कक्षा 1 से 12 तक के लिए होंगी। इसके बाद 2026 में TRE-5 का आयोजन होगा, और TRE-5 से पहले माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (STET) भी आयोजित की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सके। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन शामिल होगा, जिसमें निगेटिव मार्किंग भी होगी।

डोमिसाइल नीति के तहत, आवेदकों को बिहार का निवास प्रमाण पत्र, मैट्रिक/इंटर का प्रमाण पत्र (बिहार बोर्ड या समकक्ष से), और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। यह नीति सुनिश्चित करेगी कि बिहार के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिले, विशेष रूप से उन उम्मीदवारों को जो बिहार से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर चुके हैं।बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग लंबे समय से चल रही थी। पटना के गांधी मैदान में पिछले कुछ महीनों से छात्र डोमिसाइल नहीं तो वोट नहीं” के नारे के साथ प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांग थी कि सरकारी नौकरियों में 90-95% सीटें बिहार के मूल निवासियों के लिए आरक्षित की जाएं। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि बाहरी राज्यों के उम्मीदवार बिहार की नौकरियों में हिस्सेदारी ले रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के अवसर कम हो रहे हैं।इस नीति को लागू करने का फैसला इन प्रदर्शनों का प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है। X पर कई यूजर्स ने इसे बिहार के युवाओं के लिए ऐतिहासिक जीत करार दिया।शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डोमिसाइल नीति स्थानीय युवाओं को अवसर देगी, लेकिन शिक्षक चयन में गुणवत्ता को प्राथमिकता देनी होगी। प्रो. संजय कुमार ने कहा, 84.4% आरक्षण से बिहार के युवाओं को फायदा होगा, लेकिन लिखित परीक्षा और प्रशिक्षण में कठोर मानदंड जरूरी हैं, ताकि स्कूलों में शिक्षा का स्तर बना रहे।

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