पटना :-भारतीय डाक विभाग में हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई के तहत 50,000 से अधिक फर्जी खातों को बंद किया गया है, जिसमें पटना क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।भारतीय डाक विभाग, जो देश भर में अपनी बचत योजनाओं और डाक सेवाओं के लिए जाना जाता है, हाल ही में फर्जी खातों के जाल में फंस गया था। विभाग के आंतरिक ऑडिट और जांच के दौरान यह पता चला कि हजारों की संख्या में ऐसे खाते खोले गए थे, जो या तो गैर-मौजूद व्यक्तियों के नाम पर थे या फिर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाए गए थे। इन खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर काले धन को सफेद करने और अवैध लेन-देन के लिए किया जा रहा था।सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले का सबसे बड़ा केंद्र बिहार की राजधानी पटना रहा, जहां सबसे ज्यादा फर्जी खाते पकड़े गए। पटना के विभिन्न डाकघरों में लगभग 15,000 से अधिक फर्जी खाते बंद किए गए हैं, जो कुल संख्या का लगभग 30% है। इसके अलावा, मुजफ्फरपुर, गया, और भागलपुर जैसे अन्य बिहारी शहरों में भी बड़ी संख्या में ऐसे खाते सामने आए हैं।
यह मामला तब सामने आया जब डाक विभाग ने अपनी डिजिटल प्रणाली को अपग्रेड करने और सभी खातों का सत्यापन करने का अभियान शुरू किया। इस प्रक्रिया में आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान पत्रों के साथ खातों का मिलान किया गया। जांच में पाया गया कि कई खातों में एक ही मोबाइल नंबर या आधार नंबर का बार-बार इस्तेमाल हुआ था। इसके अलावा, कुछ खातों में जमा राशि और निकासी की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं, जो सामान्य ग्राहकों के व्यवहार से मेल नहीं खाती थीं।डाक विभाग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और साइबर क्राइम सेल के साथ मिलकर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिला कि कुछ डाक कर्मचारी भी इस घोटाले में शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने कमीशन के लालच में फर्जी खाते खोलने में मदद की।पटना में फर्जी खातों की संख्या सबसे ज्यादा होने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। पहला, पटना एक बड़ा शहरी केंद्र है जहां डाकघरों की संख्या और ग्राहकों का आवागमन अधिक है। दूसरा, बिहार में नकदी आधारित अर्थव्यवस्था का प्रचलन और कम डिजिटल जागरूकता ने इसे अपराधियों के लिए आसान निशाना बना दिया। तीसरा, कुछ स्थानीय एजेंटों और बिचौलियों ने ग्रामीण इलाकों से लोगों के दस्तावेज इकट्ठा कर उनके नाम पर खाते खोले और फिर उनका दुरुपयोग किया।डाक विभाग ने अब तक 50,000 से अधिक फर्जी खातों को बंद कर दिया है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। इन खातों में जमा राशि को जब्त कर लिया गया है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह पैसा कहां से आया और इसका इस्तेमाल कहां हुआ। पटना में सबसे ज्यादा खाते बंद होने से यह मामला राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।