इम्पैक्ट लाइव टीम पटना :बिहार की राजधानी पटना में कोरोना वायरस के सक्रिय मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट मोड में काम शुरू कर दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पटना में 1 जून 2025 तक 21 सक्रिय मामले दर्ज किए गए हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें से हाल ही में चार नए मरीजों की पहचान की गई, जिसमें इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान की एक महिला डॉक्टर भी शामिल हैं। यह स्थिति शहर में चिंता का विषय बन गई है, और सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए कई उपाय लागू किए हैं।
पटना में पिछले कुछ दिनों में कोरोना के मामलों में तेजी आई है। 31 मई 2025 को 13 मरीजों की पुष्टि हुई थी, और इसके बाद 1 जून को चार और नए मामले सामने आए। इनमें से एक महिला डॉक्टर की पॉजिटिव रिपोर्ट ने स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पटना में अब तक कुल 21 सक्रिय मामले हैं, और यह संख्या पिछले एक सप्ताह में 18 नए मामलों के साथ तेजी से बढ़ी है। गुरुवार (29 मई) को छोड़कर, हर दिन नए मामले सामने आए हैं।
हालांकि, सिविल सर्जन ने वायरस को कमजोर बताया है और कहा है कि अधिकांश मरीजों में हल्के लक्षण हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है। फिर भी, स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है और लोगों से मास्क पहनने, सामाजिक दूरी बनाए रखने, और नियमित जांच कराने की अपील की है।
पटना में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने कई कदम उठाए हैं,सभी अस्पतालों और हवाई अड्डों पर कोविड टेस्ट की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। खास तौर पर उच्च जोखिम वाले समूहों, जैसे स्वास्थ्य कर्मियों और बुजुर्गों की जांच पर जोर दिया जा रहा है।पटना के प्रमुख अस्पतालों, जैसे एम्स-पटना, पीएमसीएच , और आई.जी.आई.एम.एस में कोविड वार्ड को फिर से तैयार किया गया है। ऑक्सीजन सिलेंडर और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।पटना हमेशा से बिहार में कोरोना का केंद्र रहा है। 2020 में, पटना में 316 मामले दर्ज किए गए थे, जो राज्य में सबसे अधिक थे। 2021 में दूसरी लहर के दौरान, कंकरबाग में 479 सक्रिय मामले थे, और शहर में कुल 15,310 सक्रिय मामले दर्ज किए गए। 2022 में, पटना ने 43% नए मामलों का योगदान दिया, और टेस्ट पॉजिटिविटी रेट 20% तक पहुंच गया था। इस बार, हालांकि मामले कम हैं, लेकिन तेजी से बढ़ते मामले चिंता का कारण हैं।