इंपैक्ट लाइव टीम पटना : आज,देशभर में गंगा दशहरा का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में गंगा दशहरा एक अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी पर्व है, जो ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व मां गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है, जिसे गंगावतरण भी कहा जाता है। बिहार में इस दिन गंगा नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब देखने को मिल रहा है, जहां लोग स्नान, दान और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, गंगा दशहरा वह दिन है जब मां गंगा राजा भगीरथ के तप और प्रयासों से स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। मान्यता है कि गंगा स्नान से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह पर्व विशेष रूप से पितृ पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि गंगा का जल जन्म-जन्मांतर के पापों को शुद्ध करता है और पितरों को मुक्ति प्रदान करता है।
इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है। गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में डुबकी लगाने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है, यही वजह है कि इसे ‘दशहरा’ कहा जाता है। बिहार के पटना, भागलपुर, मुंगेर और अन्य गंगा तटीय क्षेत्रों में घाटों पर विशेष आयोजन किए जा रहे हैं।
पंचांग के अनुसार, गंगा दशहरा 2025 की दशमी तिथि 4 जून 2025 को रात 11:54 बजे शुरू हुई और 6 जून 2025 को मध्यरात्रि 2:15 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर, यह पर्व 5 जून, गुरुवार को मनाया जा रहा है।
बिहार के गंगा तटीय शहरों में प्रशासन ने इस पर्व के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। पटना के गंगा घाटों पर सुरक्षा के लिए पुलिस, जल पुलिस, और एनडीआरएफ की तैनाती की गई है। भागलपुर और मुंगेर में भी घाटों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने घाटों की साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन लागू किया है।
पटना के गांधी घाट, काली घाट, और अन्य प्रमुख घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है। स्थानीय पंडितों और ज्योतिषियों के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान और दान से दस अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।