पटना :-बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में उस समय घमासान मच गया, जब पार्टी के कई प्रमुख नेताओं ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 के समर्थन के विरोध में इस्तीफा दे दिया। यह विधेयक हाल ही में लोकसभा में पारित हुआ था, जिसमें जदयू ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के अपने सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन किया था। इस कदम से पार्टी के मुस्लिम नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई, जिसके परिणामस्वरूप इस्तीफों की झड़ी लग गई।गुरुवार, 3 अप्रैल 2025 को जदयू के वरिष्ठ नेता मोहम्मद कासिम अंसारी और मोहम्मद शाहनवाज मलिक ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। दोनों ने अपने इस्तीफे के पत्र में नीतीश कुमार को संबोधित करते हुए कहा कि विधेयक के समर्थन से मुस्लिम समुदाय में उनकी पार्टी के प्रति भरोसा टूट गया है। कासिम अंसारी ने अपने पत्र में लिखा, “मुझे दुख है कि मैंने अपने जीवन के कई साल इस पार्टी को दिए। हम जैसे लाखों भारतीय मुसलमानों का अटूट विश्वास था कि आप पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के झंडाबरदार हैं, लेकिन अब यह विश्वास टूट गया है। जदयू का रुख लाखों समर्पित मुसलमानों और कार्यकर्ताओं के लिए गहरा झटका है।”
शाहनवाज मलिक ने भी इसी तरह की भावनाएँ व्यक्त कीं और कहा कि यह विधेयक संविधान में निहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और मुस्लिम समुदाय को अपमानित और बदनाम करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह विधेयक पासमांदा मुसलमानों के खिलाफ है, जिसे ‘न तो आप और न ही आपकी पार्टी समझ पाई।’इन दो बड़े नेताओं के बाद जदयू अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश महासचिव मोहम्मद तबरेज सिद्दीकी अलीग और भोजपुर के पार्टी सदस्य मोहम्मद दिलशान राइन ने भी इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेता एम. राजू नैयर ने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा की। तबरेज सिद्दीकी ने अपने इस्तीफे में लिखा, ‘अलविदा नीतीश कुमार, अलविदा जदयू।’इन इस्तीफों ने यह संकेत दिया कि वक्फ विधेयक पर जदयू का रुख पार्टी के भीतर गहरे असंतोष का कारण बन गया है।