इम्पैक्ट लाइव टीम पटना 2025: बिहार में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 का 12वें दिन भव्य समापन होने जा रहा है। 4 मई से शुरू हुआ यह खेल महाकुंभ, जिसमें देश भर से 10,000 से अधिक युवा एथलीटों ने हिस्सा लिया, आज पटना के पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में एक शानदार समापन समारोह के साथ स्पोर्ट्स इवेंट्स समाप्त होगा। इस आयोजन ने न केवल युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया, बल्कि बिहार में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2025 में 28 खेल विधाओं में प्रतिस्पर्धा हुई, जिनमें ओलंपिक, गैर-ओलंपिक और स्वदेशी खेल जैसे मलखंब, योगासना, खो-खो, गटका और कलारीपयट्टु शामिल थे। इसके अलावा, ई-स्पोर्ट्स को पहली बार प्रदर्शनी खेल के रूप में शामिल किया गया, जिसने युवाओं का ध्यान खींचा। बिहार के पांच शहरों—पटना, राजगीर, गया, भागलपुर और बेगूसराय—के साथ-साथ नई दिल्ली में शूटिंग, जिमनास्टिक और ट्रैक साइकिलिंग जैसे इवेंट आयोजित किए गए।आज, अंतिम दिन, 45 स्वर्ण पदक दांव पर हैं, जिनमें फुटबॉल, थांग-टा, जिमनास्टिक, एथलेटिक्स, साइकिलिंग, कुश्ती, तलवारबाजी और वेटलिफ्टिंग जैसे खेल शामिल हैं।
पदक तालिका में महाराष्ट्र ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। 14 मई तक, महाराष्ट्र ने 46 स्वर्ण, 38 रजत और 36 कांस्य सहित कुल 120 पदक जीते। राजस्थान 42 पदकों (19 स्वर्ण) के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि मध्य प्रदेश, कर्नाटक और अन्य राज्य भी पदक तालिका में मजबूत स्थिति में रहे। बिहार ने मेजबान के रूप में 19 पदक (3 स्वर्ण, 8 रजत, 8 कांस्य) जीतकर 15वां स्थान हासिल किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने 4 मई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन किया था, उन्होंने खेलो इंडिया के महत्व पर जोर देते हुए कहा था कि यह मंच युवा एथलीटों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देता है।
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवींद्रण शंकरण ने कहा, खेलो इंडिया यूथ गेम्स का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि युवाओं में खेलों के प्रति जुनून जगाना और उन्हें करियर के रूप में खेल चुनने के लिए प्रेरित करना है।बिहार में पहली बार आयोजित इस आयोजन ने स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ राज्य में खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए।खेलो इंडिया पहल, जो भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, देश भर में खेलों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस आयोजन ने न केवल युवा प्रतिभाओं को सामने लाया, बल्कि पारंपरिक खेलों को भी राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई। सेपक टकरा को इस बार पदक खेल के रूप में शामिल करना भी एक ऐतिहासिक कदम रहा।