इम्पैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार के सीवान जिले के वसिलपुर गांव के वीर सपूत रामबाबू सिंह ने देश की रक्षा करते हुए जम्मू-कश्मीर सीमा पर शहादत प्राप्त की। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 9 मई को पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हुए रामबाबू ने 13 मई की सुबह दम तोड़ दिया। उनकी शहादत की खबर से पूरे गांव और बिहार में शोक की लहर दौड़ गई। विशेष रूप से यह दुख और गहरा है, क्योंकि रामबाबू की शादी दिसम्बर 2024 में हुई थी, और वह मात्र पाँच महीने पहले ही अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर पाए थे।
रामबाबू सिंह सीवान जिले के गौतम बुद्ध नगर थाना क्षेत्र के वसिलपुर गांव के निवासी थे। वह सीमा सुरक्षा बल में जवान के रूप में तैनात थे और देश सेवा के प्रति उनकी बचपन से ही गहरी लगन थी। उनके परिवार और गांव वालों के अनुसार, रामबाबू हमेशा सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करना चाहते थे। उनकी इस इच्छा ने उन्हें BSF में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।रामबाबू ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 वायु रक्षा प्रणाली का संचालन कर रहे थे। यह ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। 9 मई को जम्मू-कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी में रामबाबू गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 13 मई की सुबह उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने वीरगति प्राप्त की।रामबाबू की शहादत की खबर उनके परिवार तक पहुंचते ही कोहराम मच गया। उनकी नवविवाहिता पत्नी और माता-पिता इस अपूरणीय क्षति से गहरे सदमे में हैं। गांव वालों ने बताया कि रामबाबू की शादी को अभी तीन महीने भी पूरे नहीं हुए थे, और परिवार अभी खुशी के माहौल में था। लष्कर मुख्यालय से दुपारी गोली लगने की सूचना मिली, जिसके बाद परिवार को उनकी मृत्यु की पुष्टि की गई।रामबाबू का पार्थिव शरीर 13 मई को उनके पैतृक गांव वसिलपुर लाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।