पटना :-बिहार में बार-बार पुल ढहने की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। 2 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) को पटना हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया। यह याचिका बिहार के पुलों की सुरक्षा और उनके ढहने के कारणों की जाँच के लिए दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की मासिक आधार पर निगरानी करे और यह सुनिश्चित करे कि राज्य में पुलों की बचाव और सुरक्षा ऑडिट के लिए उचित कदम उठाए जाएँ।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार शामिल थे, उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा, “हमने राज्य सरकार का जवाबी हलफनामा देखा है। इस मामले को पटना हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जा रहा है।कोर्ट ने यह भी कहा कि पटना हाईकोर्ट को इस मामले में सभी पक्षों की सुनवाई करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बिहार में पुलों की स्थिति पर नियमित नजर रखी जाए। कोर्ट ने सभी पक्षकारों, जिसमें याचिकाकर्ता, राज्य सरकार और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) शामिल हैं, को 14 मई 2025 को पटना हाईकोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है।यह जनहित याचिका अधिवक्ता ब्रजेश सिंह ने दायर की थी, जिसमें बिहार में हाल के वर्षों में कई पुलों के ढहने की घटनाओं पर चिंता जताई गई थी। याचिका में माँग की गई थी कि इन घटनाओं की जाँच के लिए एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए। इसके साथ ही, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मानकों के अनुसार पुलों की रियल-टाइम निगरानी की व्यवस्था करने की भी माँग उठाई गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि बिहार में मानसून के दौरान भारी बारिश और बाढ़ के कारण पुलों की स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे लोगों की जान और माल को खतरा बना रहता है।सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य में लगभग 10,000 पुलों का निरीक्षण किया जा चुका है। सरकार ने अपने हलफनामे में कई योजनाओं और नीतियों का जिक्र किया, लेकिन पुलों के ढहने के सटीक कारणों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार के जवाब में ठोस कारणों का अभाव है, और इसीलिए इस मामले को पटना हाईकोर्ट में भेजा जा रहा है, ताकि विस्तृत जाँच और निगरानी हो सके।पिछले कुछ वर्षों में बिहार में कई पुल ढहने की घटनाएँ सामने आई हैं, खासकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में। इन घटनाओं ने राज्य में बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहले ही सड़क निर्माण और ग्रामीण कार्य विभागों को सभी पुराने पुलों का सर्वेक्षण करने और तत्काल मरम्मत की जरूरत वाले पुलों की पहचान करने का निर्देश दिया था। हालांकि, इन कदमों के बावजूद समस्या बनी हुई है, जिसके चलते यह मामला अदालत तक पहुँचा।