इम्पैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार की राजधानी पटना में कचरे से बिजली उत्पादन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत होने जा रही है। इस परियोजना के तहत पटना नगर निगम समेत राज्य के 11 नगर निकायों के कचरे से 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। यह परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित है, जिसके लिए बिहार सरकार 513 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस पहल को बिहार रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपो 2025 के समापन समारोह में नगर विकास एवं आवास मंत्री जिबेश कुमार मिश्रा ने घोषित किया।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहरी कचरे का उपयोग कर न केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखना है, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी बिहार को आत्मनिर्भर बनाना है। बिहार में बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए यह परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक और बिहार रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (ब्रेडा) के निदेशक राहुल कुमार ने बताया कि वर्ष 2034-35 तक बिहार में बिजली की मांग 18,708 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है। ऐसे में कचरे से बिजली उत्पादन जैसी परियोजनाएं भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
इस परियोजना में ठोस कचरे को बायोगैस और अन्य तकनीकों के माध्यम से बिजली में बदला जाएगा। इससे न केवल कचरे का निपटान होगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी होगा।
पटना के साथ-साथ बिहार के 11 अन्य नगर निकायों, जैसे गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर आदि, इस परियोजना में शामिल होंगे।कचरे के ढेर को कम करने से शहरों में स्वच्छता बढ़ेगी और प्रदूषण में कमी आएगी। साथ ही, यह परियोजना ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करेगी।
इस परियोजना की कुल लागत 513 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह पीपीपी मॉडल पर आधारित है, जिसमें निजी कंपनियों के साथ मिलकर बिहार सरकार इस प्रोजेक्ट को लागू करेगी। निजी कंपनियां तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश प्रदान करेंगी, जबकि सरकार भूमि और अन्य संसाधनों की व्यवस्था करेगी।
कचरे से बिजली उत्पादन के लिए आधुनिक वेस्ट-टू-एनर्जी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसमें बायोमेथेनेशन और थर्मल प्रोसेसिंग जैसी विधियां शामिल हो सकती हैं।
परियोजना पूरी होने पर प्रतिदिन 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा, जो हजारों घरों को रोशनी प्रदान करेगी।
यह परियोजना बिहार में बिजली उत्पादन के लिए शुरू की गई कई अन्य पहलों का हिस्सा है। हाल ही में बिहार सरकार ने अन्य परियोजनाओं की भी घोषणा की है, जैसे:
• न्यूक्लियर पावर प्लांट: केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 24 जून 2025 को घोषणा की कि बिहार के नवादा जिले के रजौली में फुलवरिया जलाशय के पास एक न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा।
• थर्मल पावर प्लांट: भागलपुर के पीरपैंती में 2400 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने के लिए चार निजी कंपनियों (अडानी पावर, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, टोरेंट पावर, और ललितपुर पावर) ने रुचि दिखाई है। इस परियोजना की लागत 28,000 करोड़ रुपये है।
• सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से बिजली: पटना के दीघा और कंकड़बाग में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से प्रतिदिन 4.5 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो चुका है।
हालांकि यह परियोजना आशाजनक है, लेकिन इसे लागू करने में कुछ चुनौतियां भी हैं, जैसे कचरे का उचित संग्रहण, प्रौद्योगिकी की लागत, और स्थानीय समुदायों का सहयोग। बिहार सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए जागरूकता अभियान और तकनीकी प्रशिक्षण शुरू करने की योजना बनाई है।