पटना: बिहार की राजधानी पटना में विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस, ने बेरोजगारी और पलायन जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन की योजना बनाई। कांग्रेस का पलायन रोको, नौकरी दो अभियान बिहार में युवाओं के बीच बढ़ती बेरोजगारी और रोजगार के लिए अन्य राज्यों में पलायन की समस्या को उजागर करने का एक प्रयास है। इस अभियान के तहत विपक्ष ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने का ऐलान किया, जिसने सियासी हलचल को और तेज कर दिया।बिहार में बेरोजगारी लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही है। विपक्ष का दावा है कि नीतीश कुमार सरकार ने युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार देने में विफलता दिखाई है, जिसके कारण लाखों लोग बेहतर अवसरों की तलाश में दिल्ली, मुंबई, और अन्य महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने इस मुद्दे पर कहा, बिहार का युवा अपनी मिट्टी छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर है। यह सरकार की नाकामी का सबूत है।
इस अभियान में कांग्रेस के साथ-साथ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के भी शामिल होने की संभावना थी। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और बिहार कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने की बात कही थी। विपक्ष का कहना है कि यह मार्च केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि बिहार के युवाओं की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का एक मंच है।यह मार्च पटना के प्रमुख चौराहों से शुरू होकर मुख्यमंत्री आवास तक जाना था। प्रदर्शनकारियों ने बैनर, पोस्टर और नारों के माध्यम से अपनी मांगों को उजागर करने की योजना बनाई थी। मुख्य मांगों में शामिल थे:
• बिहार में स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए ठोस नीतियां।
• शिक्षक भर्ती और अन्य सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता।
• पलायन रोकने के लिए औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देना।
कन्हैया कुमार ने अपने भाषण में कहा, हमारी लड़ाई केवल नौकरी के लिए नहीं है, बल्कि बिहार के सम्मान और भविष्य के लिए है। जब तक युवाओं को उनके हक नहीं मिलेंगे, हम चुप नहीं बैठेंगे।प्रदर्शन की खबरों के बीच पटना प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। पुलिस बल को शहर के प्रमुख मार्गों पर तैनात किया गया था ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने विपक्ष के इस कदम को 'सियासी ड्रामा' करार देते हुए कहा कि बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं।सियासी जानकारों का मानना है कि यह प्रदर्शन 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों का हिस्सा हो सकता है। विपक्ष, खासकर कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल, बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों को उठाकर नीतीश कुमार और बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने भी हाल ही में एक बयान में कहा था, बिहार के युवाओं का भविष्य अंधेरे में है। सरकार केवल वादे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।
विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान केवल एक दिन का प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में बिहार के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के मार्च और सभाएं आयोजित की जा सकती हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाकर जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में हैं।