पटना: बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार को कांग्रेस नेता और एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार को पटना पुलिस ने हिरासत में लिया। कन्हैया कुमार अपनी ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ यात्रा के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास का घेराव करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ निकले थे। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कन्हैया सहित कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, जिसके बाद शहर में सियासी हलचल तेज हो गई। कोतवाली लॉ एंड ऑर्डर डीएसपी कृष्ण मुरारी ने इसकी पुष्टि की है।
कांग्रेस ने बिहार में बेरोजगारी और पलायन को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान का नेतृत्व कन्हैया कुमार कर रहे हैं, जिन्होंने पिछले कुछ हफ्तों से बिहार के विभिन्न जिलों में पदयात्राएं कीं। यह यात्रा बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल) को पटना में समाप्त होने वाली थी। शुक्रवार को इस अभियान के तहत कन्हैया कुमार ने हजारों कार्यकर्ताओं के साथ मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की योजना बनाई थी। कांग्रेस का दावा था कि इस प्रदर्शन में 5,000 से अधिक कार्यकर्ता शामिल होंगे।
प्रदर्शन का उद्देश्य बिहार में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और पलायन रोकने के लिए सरकार पर दबाव बनाना था। कन्हैया ने पहले कहा था, बिहार का युवा अपने घर-परिवार छोड़कर अन्य राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर है। नीतीश सरकार ने रोजगार के नाम पर केवल वादे किए, लेकिन जमीन पर कोई बदलाव नहीं दिखता।पटना पुलिस को पहले से ही इस प्रदर्शन की जानकारी थी। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए शहर के प्रमुख मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जैसे ही कन्हैया कुमार और उनके समर्थक मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प की खबरें भी सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने कन्हैया कुमार और कई अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया।कोतवाली डीएसपी कृष्ण मुरारी ने कहा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। प्रदर्शनकारी बिना अनुमति के मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे, जिसे रोकना पड़ा।हिरासत में लिए गए नेताओं को स्थानीय पुलिस स्टेशन ले जाया गया, और कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है। पार्टी के प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कहा, ‘कन्हैया कुमार और हमारे कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे थे। बिहार सरकार डरी हुई है और युवाओं की आवाज दबाना चाहती है।’उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीतीश सरकार बेरोजगारी के मुद्दे पर जवाब देने से बच रही है।इस घटना ने बिहार के सियासी माहौल को और गरमा दिया है। एक तरफ गांधी मैदान में जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर की रैली चल रही थी, तो दूसरी तरफ कन्हैया कुमार का प्रदर्शन सुर्खियों में रहा। कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान रुकेगा नहीं और वे बिहार के हर कोने में बेरोजगारी का मुद्दा उठाते रहेंगे।कन्हैया कुमार ने हिरासत से रिहा होने के बाद कहा, यह सिर्फ शुरुआत है। हम बिहार के युवाओं के हक के लिए लड़ते रहेंगे। सरकार चाहे जितना दबाव बनाए, हम झुकने वाले नहीं हैं।उन्होंने कार्यकर्ताओं से 14 अप्रैल को पटना में होने वाले समापन समारोह में भारी संख्या में शामिल होने की अपील की।पटना प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कड़े इंतजाम किए थे। शहर के प्रमुख चौराहों पर बैरिकेड्स लगाए गए, और ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना अनुमति के किसी भी तरह के प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जाएगी।