Monday 08-Dec-2025

दरभंगा में राहुल गांधी पर विवाद, शिक्षा न्याय संवाद कार्यक्रम को लेकर हंगामा

दरभंगा में राहुल गांधी पर विवाद, शिक्षा न्याय संवाद कार्यक्रम को लेकर हंगामा

इंपैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार के दरभंगा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के दौरे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। राहुल गांधी शिक्षा न्याय संवाद  कार्यक्रम के तहत दरभंगा के आंबेडकर कल्याण छात्रावास में दलित, पिछड़े, और अति पिछड़े वर्ग के छात्रों से संवाद करने पहुंचे थे। हालांकि, इस कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तनाव देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप राहुल गांधी और 100 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की गईं।

राहुल गांधी का यह दौरा बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक न्याय और शिक्षा के मुद्दों को उठाने के लिए था। कांग्रेस ने शिक्षा न्याय संवाद के तहत आंबेडकर कल्याण छात्रावास में छात्रों से मुलाकात का आयोजन किया था। लेकिन दरभंगा जिला प्रशासन ने इस कार्यक्रम के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया और इसके बजाय टाउन हॉल राजेंद्र भवन में आयोजन की अनुमति दी। प्रशासन का कहना था कि छात्रावास में राजनीतिक सभा की अनुमति नहीं दी जा सकती।इसके बावजूद, राहुल गांधी ने प्रशासन के आदेशों की अवहेलना करते हुए आंबेडकर छात्रावास में ही कार्यक्रम करने का फैसला किया। पुलिस ने उनके काफिले को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के गेट पर रोकने की कोशिश की, लेकिन राहुल गांधी लगभग 2.5 किलोमीटर पैदल चलकर छात्रावास पहुंच गए। वहां उन्होंने करीब 2,000 छात्रों को संबोधित किया, जिसमें 11वीं, 12वीं और स्नातक के छात्र शामिल थे।राहुल गांधी ने इस एफ.आई.आर को मेडल करार देते हुए कहा, ये मेरे लिए सम्मान की बात है। मेरे खिलाफ 30-32 मामले हैं।उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, मैं दिल्ली से आपसे बात करने और आपकी समस्याएं सुनने आया था। प्रशासन ने रास्ते बंद किए, बैरिकेड लगाए, लेकिन मैं दूसरा रास्ता ढूंढकर आ गया। आपकी ताकत मेरे साथ है, और दुनिया की कोई ताकत इसे रोक नहीं सकती।राहुल ने इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अनुसूचित जाति , अनुसूचित जनजाति , अन्य पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग के खिलाफ अत्याचार हो रहा है। उन्होंने जातीय जनगणना और निजी संस्थानों में आरक्षण की मांग को दोहराया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 90% आबादी के दबाव में ही जातीय जनगणना की घोषणा की।

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