इम्पैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, और इस बार राजनीतिक रणभूमि सड़कों से निकलकर डिजिटल दुनिया में पहुंच गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी ) के बीच 15 साल बनाम 20 साल के नारे के तहत तीखी डिजिटल वीडियो वॉर छिड़ गई है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के शासनकाल की कमियों को उजागर करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं, जिससे बिहार की सियासत में नया रंग चढ़ गया है।
बिहार की राजनीति में पहले पोस्टर और होर्डिंग्स के जरिए सियासी जंग लड़ी जाती थी, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी , जो एनडीए का प्रमुख हिस्सा है, उस ने डिजिटल हथियार उठाया है। बीजेपी ने हाल ही में कई वीडियो जारी किए, जिनमें लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के 15 साल के शासनकाल (1990-2005) को निशाना बनाया गया। इन वीडियो में आरजेडी शासन के दौरान कथित जंगलराज, भ्रष्टाचार, और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति को उजागर किया गया है। बीजेपी ने इन वीडियो में दावा किया कि उनके शासन में बिहार विकास के पथ पर अग्रसर हुआ, जबकि आरजेडी के दौर में राज्य पिछड़ गया।
आरजेडी भी इस डिजिटल जंग में पीछे नहीं है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी ने एनडीए के 20 साल के शासन (2005-2025) पर सवाल उठाते हुए कई वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट जारी किए। इनमें नीतीश कुमार और बीजेपी की गठबंधन सरकार पर बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति, और पलायन जैसे मुद्दों को लेकर निशाना साधा गया है। आरजेडी ने अपने वीडियो में नौकरी रोजगार खा गए, पलटू और गप्पू दोनों धोखेबाज रजऊ जैसे तीखे नारे दिए, जो नीतीश कुमार और बीजेपी पर कटाक्ष करते हैं।
पटना में आरजेडी ने डिजिटल प्रचार के साथ-साथ पोस्टर वॉर भी जारी रखा है, जिसमें नीतीश कुमार को पलटू कुमार कहकर उनकी बार-बार गठबंधन बदलने की आदत पर तंज कसा गया। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाते हुए युवा वोटरों को लुभाने की कोशिश की है।
इस डिजिटल वॉर का मुख्य आधार 15 साल बनाम 20 साल का नारा है। बीजेपी और एनडीए अपने 20 साल के शासनकाल में बिहार में सड़कों, बिजली, और बुनियादी ढांचे के विकास का दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर, आरजेडी का कहना है कि एनडीए के शासन में बिहार की प्रगति केवल सतही रही और आम लोगों को इसका कोई खास फायदा नहीं मिला। दोनों पक्षों के वीडियो में आंकड़ों, पुरानी तस्वीरों, और नाटकीय प्रस्तुति का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि मतदाताओं का ध्यान खींचा जा सके।