बिहार : बिहार के भागलपुर जिले में स्थित प्राचीन विक्रमशिला महाविहार के पास एक नया केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस परियोजना की आधारशिला अप्रैल-मई 2025 में रखे जाने की संभावना है। यह विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक नया आयाम जोड़ेगा, बल्कि इस क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी पुनर्जनन देगा।विक्रमशिला महाविहार की स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल (783-820 ईस्वी) ने की थी। यह प्राचीन काल में बौद्ध और तांत्रिक शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र था, जो नालंदा विश्वविद्यालय के समकक्ष माना जाता था। 12वीं शताब्दी में बख्तियार खिलजी द्वारा इसे नष्ट कर दिया गया था, लेकिन इसके अवशेष आज भी इसकी भव्यता की कहानी बयां करते हैं। यहाँ से प्राप्त कई हिंदू और बौद्ध मूर्तियाँ, जैसे महाकाल की मूर्ति, इस बात का प्रमाण हैं कि यहाँ विभिन्न धर्मों का संगम था।
केंद्र सरकार ने विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह विश्वविद्यालय भागलपुर के कहलगाँव में 205 एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर की एक टीम ने हाल ही में महाविहार के खुदाई स्थल और आसपास के गाँवों का दौरा कर जमीन का सत्यापन किया। अधिकारियों का कहना है कि यह विश्वविद्यालय प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की तर्ज पर एक उत्कृष्ट शैक्षणिक केंद्र होगा।24 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भागलपुर में घोषणा की थी कि विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय का निर्माण जल्द शुरू होगा। सूत्रों के अनुसार, अप्रैल या मई में होने वाले शिलान्यास समारोह के दौरान पीएम इस क्षेत्र के सिल्क उद्योग के जीर्णोद्धार से संबंधित अन्य घोषणाएँ भी कर सकते हैं। यह समारोह हवाई अड्डा परिसर में आयोजित होने की संभावना है।स्थानीय इतिहासकारों और नागरिकों का मानना है कि यह विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि पर्यटन को भी प्रोत्साहन देगा। विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य, जो गंगा नदी के किनारे 50 किलोमीटर तक फैला है और लुप्तप्राय गांगेय डॉल्फिन की रक्षा करता है, पहले से ही इस क्षेत्र में पर्यटकों को आकर्षित करता है। नया विश्वविद्यालय इस प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को और प्रमुखता देगा।