पटना :-बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक और पूर्व चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार बदलाव यात्रा की शुरुआत कर सियासी हलचल तेज कर दी है। उनकी यह पहल बिहार की राजनीति में एक नए विकल्प के रूप में उभर रही है, जो नीतीश कुमार की जेडीयू, तेजस्वी यादव की आरजेडी, और बीजेपी जैसे स्थापित दलों को चुनौती दे रही है।प्रशांत किशोर ने 2022 में जन सुराज की स्थापना की थी, जिसका लक्ष्य बिहार में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, और खराब शासन से मुक्ति दिलाना था। इसके लिए उन्होंने 2022-2024 तक 3,500 किलोमीटर की पदयात्रा की, जिसमें वे बिहार के गांवों, कस्बों, और शहरों में लोगों से मिले। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और पलायन जैसे मुद्दों को समझा और जनता की नाराजगी को अपनी रणनीति का आधार बनाया।11 अप्रैल 2025 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित बिहार बदलाव रैली इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव थी। इस रैली के बाद किशोर ने बिहार बदलाव यात्रा शुरू करने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य बिहार के हर जिले में जाकर लोगों को एकजुट करना और 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए समर्थन जुटाना है।
11 अप्रैल को गांधी मैदान में लाखों की भीड़ उमड़ी। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि यह रैली बिहार में बदलाव की चाह रखने वालों का मंच थी। उन्होंने कहा, जन सुराज का परिवार इतना बड़ा है कि इसे गांधी मैदान ही समा सकता है। दो साल की पदयात्रा में मैंने ‘बदलाव’ शब्द सबसे ज्यादा सुना।किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला और कहा कि वह बिहार के विकास के लिए अब सक्षम नहीं हैं। उन्होंने नीतीश का ‘राजनीतिक श्राद्ध’ करने की बात कही और दावा किया कि 2025 में नीतीश मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे, चाहे वह किसी भी गठबंधन के साथ हों।किशोर ने बिहार प्रशासन पर रैली में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार के इशारे पर पुलिस ने उनके समर्थकों को पटना पहुंचने से रोका और करीब दो लाख लोगों को शहर में प्रवेश करने से वंचित किया गया।
किशोर ने भ्रष्टाचार, पलायन, और शासन की कमी को अपने अभियान के मुख्य मुद्दे बनाया। उन्होंने कहा, लालू प्रसाद ने जंगलराज दिया, नीतीश ने नौकरशाही का जंगलराज लाया, और नरेंद्र मोदी ने बिहार को निराश किया। जन सुराज इन सबको उखाड़ फेंकेगा।प्रशांत किशोर की बिहार बदलाव यात्रा अब शुरू हो चुकी है। अगले कुछ महीनों में उनकी सभाएं और रणनीतियां बिहार की सियासत को नई दिशा दे सकती हैं। किशोर ने कहा, यह यात्रा सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि बिहार को विकसित राज्यों की कतार में लाने की है।उनकी इस यात्रा पर बिहार की जनता और सियासी दलों की नजरें टिकी हैं।